Wednesday, September 8, 2010

आधुनिक राधा

कृष्ण तुम कब आओगे! हे कृष्ण समय बदल गया है न जुएं की चौपाल है, न कौरव-पांडव की हार-जीत है, न चीर है और न ही चीरहरण का माहौल है। इसलिए मैंने खुद को ही बदल लिया है। अब मैं महाभारत की द्रौपदी नहीं हूं। आधुनिक भारत की प्रिंयका हूं, बेधड़क घूमती हूं कम से कम कपड़ों में, पार्टियों में, माल में, आफिस में, सब जगह मौज ही मौज है। मैं ही आपकी आधुनिक राधा हूं, हे कृष्ण तुम कब आओगे! फोन की घंटी बजी तो स्वप्न टूटा नींद खुली। हेलो, कौन! अरे करिश्मा तू , ओ सिट तूने सब खराब कर दिया। क्या हुआ! कितना अच्छा स्वप्न देख रही थी, कृष्ण से बातें कर रही थी। चल छोड़ हर समय सपने में ही मत रहा कर, तैयार हो, आज कृष्ण जन्माष्टमी है मैं तुझे लेने आ रही हूं क्यों, क्या हुआ आज बॉस को कृष्ण बनाएंगे और हम दोनों राधा बनकर उसको लूटेंगे .. नहीं-नहीं बॉस कहीं उलटा हमको ही न लूट ले। देखती नहीं उसकी कैसे लार टपकती है मुझे और तुझे देखकर। अरे वो कुछ नहीं कर पाएगा अपन साथ में जो रहेंगे। नहीं, आज उलटा-सुलटा कुछ नहीं करेंगे। आज कृष्ण जरुर आएंगे, मेरा स्वप्न आज झूठा नहीं होगा। एक काम कर तू वो मिनी ड्रेस पहन कर आ जा फिर चलते हैं। दोनों मिनी-से-मिनी ड्रेस पहन कर निकल पडी प्रियंका तेरा ये क्या लाजिक है मिनी ड्रेस पहनने का, अरे तू नहीं समझेगी, याद है कृष्ण कैसे छिप-छिप कर गोपियों को नहाते देखते थे। कैसे निहारते रहते थे। आज अपन दोनों ने जो मिनी ड्रेसेज पहनी हैं उन्हें देखकर कृष्ण जरूर आएंगे। कम से कम एक बार हमें छेड़ जाएंगे तो अपना जीवन सार्थक हो जाएगा। हे कृष्ण तुम कब आओगे! वो सब तो ठीक है कहीं कोई लफंगा आकर न छेड़ जाए! देख नहीं रही अपनी ड्रेस को! क्या-क्या झलक रहा है! अरे किसी की हिम्मत नहीं होगी अपने से पंगा लेने की। तभी अचानक एक महाशय हाजिर हुए घूर घूर कर सिर से पैर तक देखना शुरू। अबे ये घूर-घूर के देखना बंद कर और निकल ले यहां से। समझा की नहीं समझा। हाय स्वीट हार्ट, क्या मक्खन के माफिक चिकनी लग रही हो। चल चल बहुत हो गया अब निकल ले, नहीं तो दूंगी एक चपाट। अच्छा नाटक है पहले बुलाते हो फिर भगाते हो। ठीक है चले जाते हैं ऊफ कितनी क्यूट राधाएं हैं। अरे प्रियंका तू क्या बडबडा रही थी किससे बातें कर रही थी देखा नहीं उस टपोरी को, कैसे लार टपक रही थी उसकी हमें देखकर। कहां, कौन अरे तूने नहीं देखा उस टपोरी को जो थोड़ी देर पहले यहां आया था। नहीं यहां तो कोई नहीं आया। ओफ हो, कहीं श्रीकृष्ण तो नहीं, देख देख वो जा रहे हैं अरे हां प्रियंका जा तो रहे हैं। देखते देखते नज़रों से ओझल हो गए। क्या वो अपने पास आए थे अरे हां यार अपन दोनों को छेड़ रहे थे। श्रीकृष्ण ने कहा-हाय स्वीट हार्ट।

1 comment:

महेन्द्र मिश्र said...

देखा नहीं उस टपोरी को, कैसे लार टपक रही थी उसकी हमें देखकर ....

अपनी भी लार टपटपाने लगी है ... हा हा