Saturday, October 29, 2011

खूबसूरत पराई युवती को निहारने से बचें

पराई युवती को निहारने से बचना चाहिए, उसपर अगर वह खूबसूरत भी हो तो मामला और भी गंभीर हो जाता है, क्योंकि इससे आपके हॉर्मोन का स्तर में सिर्फ 5 मिनट में इतना अधिक बढ़ सकता है, कि आपके दिल के लिए दर्द का सबब बन जाए।

न्यूज पेपर 'डेली मेल' ने बताया कि एक रिपोर्ट के मुताबिक स्पेन के शोधकर्ताओं ने अपने स्टडी में यह निष्कर्ष निकला है कि अजनबी खूबसूरत महिलाओं को देखकर पुरुष का मन विचलित हो जाता है, जो उड़ते प्लेन से नीचे कूदने जैसा है। स्टडी में कहा गया है कि इससे खून में मौजूद कॉर्टिसोल हॉर्मोन का स्तर बढ़ने से दिल का दौरा भी पड़ सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक शोधकर्ताओं का कहना है कि यह मानसिक तनाव लंबे समय तक रहने से कॉर्टिसोल का स्तर लगातार बढ़ है, जिससे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। इससे हाइपर टेंशन और शरीर में कई अन्य गड़बड़ियां पैदा हो सकती हैं। शोधकर्ताओं ने इस शोध के लिए 84 छात्रों पर अध्ययन के अंतर्गत उन्हें खूबसूरत अजनबी महिलाएं दिखाकर, उनके कॉर्टिसोल के स्तर में हुए बदलाव को दर्ज किया।

Thursday, April 28, 2011

73 Lac Crores Looted

List of Scams :
Jeep Scandal (1984)

Haridas Mundhra Scandal (1957)
KD Malviya-Sirajuddin Oil Scandal
Nagarwala Scandal (1971)
Declaration of Emergency (1975)
Sukhna Land Scandal.
Oil for Food Programme Scam
Barak Missile Scandal
Palmolein Oil Scan
Initial Public Offer (IPO) Scam
Mining Scams.
Bitumen Scams.
Cement Scandal.
IPL Scam
Animal Husbandry Scam
Satyam Software Services Scam
Tansi Land Scam
ULIP Insurance Scam
Cash for Votes Scandal
RBG Resource Scam.
Bangalore-Mysore Infrastructure Corridor Fraud
Bofors Scam
Haji Scams.
Animal Fodder Scam
Human Trafficking Scam
Chuhat Lottery Scam.
Telgi Stamp Papers Scam
Urea SCam
St. Kitts Forgery
Anantnag Transport Subsidy Scam
Yuoslav Dinar Scam
Kargil and Coffin Scam
Uday Goyal Arrow Global Agrotech Scam.
Emaar Scam
Spiritual Guru Scams.
HDW submarine Scandal
Kashmir Sex Racket Scam
Babri and Ram Mandir Scam.
Land Acquisition Scams on name of SEZ with harassment false cases.
Profident Fund scam with current corrupted judges in both supreme court and High Court
Ketan Parek Stock Market Scam
Bansali Scam
Cobbler and Shoes Scam.
Nagarjuna Finance Scam.
Dalmia DSQ Software Scam.
UTI Scam
Uday Goyal Scam
Letter of Credit (LOC) Scam
Sanjay Agrawal Home Trade Scam.
LIC Insurance Scam.
Harshad Mehta Stock Market.
Suflam Sujalam Scam.
Madhavpura Mercantile Cooperative Bank (MMCB) Scam
Hawala Transaction Scams
Global Trust BAnk Scam and Bankruptcy
Charminar Cooperative Urban Bank Scam & Bankruptcy.
Krushi Cooperative Urban Bank Scam & Bankruptcy.
Vasavi Bank Scam
Prudential Bank Scam
Nagpur District Central Cooperative Bank Scam
2010 Housing Loan Scam
Sugar Import Scam
Prefrential Allotment Scam
Meghalya Forest Scam
Fertiliser Import Scam.
Telecom Scam
SNC Lavalin Power Project Scam
Teak Plantation Swindle Scam
Scorpene Submarine Scam.
Taj Corridor Scam
Army Ration pilferage Scam
State Bank of Saurashtra Scam
Flood Relief Scam
Rice Export Scam
Bulletproof Jackets Scam
MCD Pension Scam
AICTE Scam
Medical Council of India (MCI) Scam
Rail Recruitment Scam
Nrega Scam
Siachen Scam
J & K Milk Scam
Gorshkov Scam
MPLAD Scam
PDS Scam
Rajya Sabha Vote Scam
Cash for Question in Parliament Scam
City Limouzine & Realcom Scam
Common Wealth Games Corruption
Adarsh Housing Society Scam
2G Spectrum Scam.

Friday, January 14, 2011

वाह हमारे प्रधानमंत्री जी - देश का बंटाधार निश्चित हैं

प्रधानमंत्री जी, आप कहते हैं कि लोग ज़्यादा और बेहतर खाने लगे हैं इसलिए खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ गई है और इसलिए उनकी क़ीमतें बढ़ रही हैं.
आपका कहना है कि यह सरकार की सामाजिक न्याय दिलवाने की पहल का ही नतीजा है क्योंकि देश में बहुत से लोगों को इसका फ़ायदा हुआ है, उनकी आमदानी बढ़ी और वे अच्छा खा-पी सकते हैं.
पर आख़िर कौन हैं ये लोग प्रधानमंत्री जी? और वो कौन सी योजना है जो उन्हें बेहतर जीवन दे रही है?
आपकी सरकार ने एक योजना शुरु की है जिसका नाम महात्मा गांधी ग्रामीण रोज़गार गारंटी क़ानून (मनरेगा) है.
इस योजना के अंतर्गत गांवों में रह रहे हर परिवार के व्यक्ति को कम से कम 100 दिन का रोज़गार साल में मिलता है. अब आपने महंगाई के मद्देनज़र मेहनताना भी 100 रुपये प्रतिदिन से बढ़ाकर 120 रुपए के आसपास कर दिया है. इस तरह से देखें तो साल में हर ग्रामीण परिवार को 12 हज़ार रुपये तो मिलेंगे ही.
12 हज़ार रुपए, वाह! गांववालों की तो चांदी हो गई... लेकिन ज़रा रुकिए..12 हज़ार रुपये मतलब 32 रुपये रोज़. मान लिया जाए कि यह मनरेगा में काम करने वाले के परिवार की कुल आमदनी है.
३२ रुपया में थाली खाली 
अब आज की महंगाई देखिए. दाल, चावल से लेकर दूध, अंडे और माँस-मछली तक सभी के दाम कहाँ पहुँच गए हैं? आपकी सरकार के आंकड़े कह रहे हैं कि खाद्य पदार्थों की महंगाई की दर 18 प्रतिशत तक बढ़ गई है.
क्या आपने कभी सोचा है कि इस महंगाई में 32 रुपए रोज़ कमाने वाले परिवार की थाली में क्या परोसा जाता होगा?

आपके घोषित उत्तराधिकारी राहुल गांधी तो कभी-कभी दलितों के घर पर जाते रहे हैं कभी उनसे पूछिएगा कि उनकी थाली कैसे भरती है और क्या दिन में दोनों वक़्त ठीक से भरती है?
आंध्र प्रदेश से लेकर मध्यप्रदेश तक आज भी किसानों की आत्महत्या की ख़बरें आ रही हैं. जब आपकी सरकार समृद्धि फैला रही है तो ये नासमझ क्यों आत्महत्या कर रहे हैं मनमोहन जी?
कौन है वह जिसे आपकी सरकार आम आदमी कहती है?
चलिए उनकी बात करें जो आपके मनरेगा के भरोसे नहीं हैं. जो रिक्शा चलाता है, ऑटो चलाता है, ड्राइवरी करता है, दुकान में काम करता है या घरेलू काम करता है. वो बहुत कमाता है तो पाँच-सात हज़ार रुपया महीना कमाता है. चार लोगों का आदर्श परिवार भी हो तो घर का किराया देने के बाद उसके पास खाद्य सामग्री ख़रीदने के लिए कितना पैसा बचता होगा मनमोहन जी? और फिर उसे बच्चों की पढ़ाई के लिए, कपड़ों के लिए और गाहे-बगाहे होने वाली बीमारी के लिए भी तो पैसा चाहिए?

चलिए अपने राजप्रासाद से निकलिए किसी दिन चलते हैं आपके आम आदमी से मिलने.
और मनमोहन जी जब आप ऐसे बयान दें तो अपनी पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी कुछ जानकारी दे दिया करें.
देखिए ना, अभी दो दिन पहले एक राष्ट्रीय कहे जाने वाले अख़बार में अपने नाम से लेख लिखा है और कहा है कि देश की 40 प्रतिशत आबादी ग़रीबी रेखा के नीचे है, 9.3 करोड़ लोग झुग्गी झोपड़ी में रहते हैं, 12.8 करोड़ को साफ़ पानी नहीं मिलता, 70 लाख बच्चे शिक्षा से कोसों दूर हैं.
ये तो आपके आम आदमी से भी गए गुज़रे लोग दिखते हैं.
तो फिर प्रधानमंत्री जी कौन हैं वो लोग जो बेहतर खा रहे हैं और महंगाई बढ़ा रहे हैं?
इन्हें हमारे देश की चिंता हैं पर हमारे प्रधानमंत्री को नहीं (कभी गरीबो की बस्ती में २-४ रात आम आदमी की तरह गुजारे तो पता चले)

Source : BBC (Renu Agaal)

आइये बिहार के विकास में हमसफ़र बने.

Roots To Bihar

Friday, September 17, 2010

क्या आपने देखा है भगवान् को? (अयोध्या राम मंदिर पर विशेष )

 मेरी समझ में ये नही आता है कि जिस चीज को किसी ने नही देखा है उसके लिए क्यों सर खपाते हैं? क्यों हम किसी भगवान् या अल्लाह के लिए अपना सारा काम काज छोड़ कर उसके विषय पर चर्चा करें? क्या आज तक किसी ने भगवान् या अल्लाह को साक्षात देखा है? या कोई ऐसा चमत्कार जिस से की सिर्फ भगवान् या अल्लाह की मौजूदगी का अहसास हो? क्या आपने देखा है भगवान् को? फिर आप और हम क्यों चिंता करें भगवान् की? अगर भगवान् स्वयं शक्तिशाली हैं तो क्यों नहीं अभी तक आकाश से आकाशवाणी हुई कि- हाँ वहां राम मंदिर का निर्माण होना चाहिए. जिस भगवान् राम ने सारे ब्रह्माण्ड की संरचना की क्यों वो खुद के लिए मंदिर की निर्माण नहीं कर सकते?

दरअसल ना तो कोई भगवान् हैं ना ही कोई अल्लाह ना ही कि जीसस . सभी एक ही शक्ति के अलग अलग नाम हैं. हम इंसान भी बेहद मुर्ख हैं जो एक ही शक्ति की उपासना करते हैं लेकिन सिर्फ बोलचाल की भाषा के कारण उसे अलग अलग नाम से पुकारते हैं और उसी नाम के चलते आपस में लड़ते भी हैं. 

जिस परम शक्ति ने हमें धरती दी है हमारी ये औकात कि हम उसी धरती पर उनके लिए घर बना सकें और अपने आप को भगवान् या अल्लाह का आश्रयदाता कहला दें? जिस भगवान् या अल्लाह ने मनुष्य को खरबों खरब टन अनाज दिया है हम उन्ही को उन्ही के दिए अनाज के चंद दानों का प्रसाद चढ़ा कर अपने वश में करना चाहते हैं? मनुष्य की कोई औकात ही नही है कि वो उस परम शक्ति के लिए धरती पर चंद इंटो को घर बना देजिन्होंने इस धरती का ही नहीं बल्कि इस सौरमंडल की तरह लाखों सौरमंडल का निर्माण किया हो.

दस मंजिली इमारत के छत पर से आप अगर नीचे देखोगे तो नीचे दिखने वाले इंसान चीटियों की तरह नजर आते हैं. वहां से तब कुछ पता नहीं चलता कि कौन हिन्दू है कौन मुस्लिम है , कौन सिख है या कौन इसाई? सभी एक ही तरह दिखने लगते हैं और हम कहते हैं कि वो इंसान हैं.

आप घर में या बाहर जो खाना खाते हैं क्या आपने कभी सोचा है कि इस खाने का अनाज हिन्दू के खेत का है या मुस्लिम के खेत का? आप जो वस्त्र पहनते हैं क्या आप सोचते हैं कि इस वस्त्र को बुनने वाले हाथ हिन्दू के हैं या मुस्लिम के? हम सभी इंसान हैं और इंसान ही इंसान कि जरूरत को पूरा कर सकता है.

धर्म का निर्माण जंगली मनुष्य को सामाजिक मनुष्य के रूप में परिवर्तित करने के लिए किया गया. किन्तु आज के नेता लोग उसी धर्म को सामाजिक मनुष्य को जंगली मनुष्य बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं.

By the way ... मेरे विचार से जिस जगह पर राम मंदिर का निर्माण करने के लिए कहा जा रहा है वो जगह बेहद छोटी है एवं तंग गलियों से हो कर जाना पड़ता है. अगर राम मंदिर का निर्माण करना ही है तो कोई आवशयक नहीं कि उसी स्थान पर किया जाए. मेरा ये मत है कि पूरी अयोध्या ही भगवान् राम कि जन्मभूमी है इसलिए उस स्थान से हट कर कहीं हट कर अयोध्या में ही कम से कम 10 वर्ग किलोमीटर के स्थान चुन कर भगवान् राम का भव्य एवं विशाल मंदिर बनाया जाना चाहिए क्यों को भगवान् का घर कोई छोटे मोटे स्थान पर हो तो उसका महत्व कम हो जाता है. विशाल जगह ही भगवान् के विराट स्वरुप का सही प्रदर्शन कर सकता है. लेकिन एक शर्त ये भी होनी चाहिए कि उस विशाल मंदिर में सभी धर्मों के लोगों को आने का मौक़ा देना चाहिए ताकि देश से ही नही बल्कि विदेश से भी अनेकों विदेशी आ कर भारतीय सभ्यता का भव्यता देख कर अभिभूत रह जाएँ और परम शक्ति को पूजने का अधिकार सभी मनुष्य को मिलना चाहिए. इस प्रकार से अयोध्या में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. मेरे विचार से भारत सरकार और राज्य सरकार दोनों को भारत में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अयोध्या में विवादित स्थान से हट कर एक इतना विशाल भव्य राम मंदिर का निर्माणकरे कि जिस प्रकार ताजमहल , लालकिला आदि 500 सालों के बाद भी भारतीय संस्कृती की पहचान बनी हुई है उसी प्रकार से आने वाले सैकड़ोंसालों तक विशाल राम मंदिर भी भारतीय संस्कृति कि पहचान बनी रहे.

मुझे नहीं लगता कि विवादित स्थान से अलग मंदिर बनाए जाने पर हिन्दू या मुसलमानों को कोई प्रकार की आपत्ति होनी चाहिए.
मै फिर कहूँगा कि उस चीज के लिए मत लड़े जिसे किसी ने हज़ारों सालो से नहीं देखा है. धर्म सिर्फ आस्था का विषय है. धर्म हमें जीना सिखाती है किसी मानव को मारना नहीं. 

Wednesday, September 15, 2010

राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण हो ?

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने देश के मुसलमानों का आ ान किया है कि वे खुद आगे आकर राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण की पहल कर दुनिया को बताएं कि उन पर लगने वाला विदेशपरस्ती का आरोप बेबुनियाद है। उन्होंने साफ किया कि हिंदुओं को नीचा दिखाने के लिए अयोध्या में मंदिर ढहाकर विवादित ढांचा बनाया गया था। हाई कोर्ट का फैसला 24 सितंबर को आने वाला है। उसके पहले संघ प्रमुख का यह बयान काफी मायने रखता है। दिल्ली में एक कार्यक्रम में भाग लेने आए भागवत ने कहा कि हर हिंदू चाहता है कि अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण हो। चूंकि मामला अदालत में है, इसलिए वहां के निर्णय का इंतजार किया जा रहा है। फैसला जो भी हो, संघ की प्रतिक्रिया लोकतांत्रिक होगी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने दो टूक कहा कि आगे की कार्रवाई के लिए अगर सुप्रीम कोर्ट भी जाना पड़ा तो जाएंगे लेकिन यह बाद की बात है। उन्होंने कहा कि संघ इस मुद्दे पर देश को विभाजित नहीं देखना चाहता है इसलिए पिछले 5-6 साल से मुस्लिम नेताओं से बातचीत भी जारी है। उन्हें बताया जा रहा है कि राम मंदिर आंदोलन किसी भी रूप में मुसलमानों के खिलाफ नहीं है
Ramjanmbhumi Ramjanambhumi ayodhya 

सपनों में खिड़कियां

दीवार में खिड़कियां स्वच्छ हवा आने के लिए होती हैं। वे अकसर खुलने और बंद होने की प्रक्रिया से गुजरती हैं। खिड़कियां झांकने के लिए भी होती हैं। कई बार हमें खिड़कियों के खुलने का बेसब्री से इंतजार रहता है, लेकिन ऐसा हर खिड़की के साथ नहीं होता। कोई खास खिड़की होती है, जिसके खुलने की प्रतीक्षा में हम पूरा दिन बिता देते हैं। उसके खुलने की राह देखते-तकते आंखें पथराकर सफेद हो जाती हैं। किसी के इंतजार में अमूमन ऐसा होता ही है। पर मनहूस खिड़की है कि कभी-कभी खुलती ही नहीं। आंखें दिखा देती हैं। आठ पहर बीत गए और हम हैं कि नजरें गड़ाए बैठे हुए हैं
इन बेजान खिड़कियों को किसी के दर्द का क्या पता। खिड़की पर किसी के हाथ की जुंबिश हुई कि हमारी आंखें फैलकर चौगुनी हो गईं। लो, हो गया दीदार। कोई एक पल भी झांककर चला गया, तो समझो कि जन्नत नसीब हो गई। गोया हवा का एक शीतल झोंका दिल के भीतर तक उतरकर सराबोर कर गया हो। मुझे लगता है कि हर किसी की जिंदगी की दीवार में एक अदद खिड़की का वजूद रहता है। बकौल शायर, हमने तुमने बचपन में अपनी-अपनी खिड़की से/ आईनों की किरणों से कितने खेल खेले हैं/ अब जवान होते ही क्या हुआ खुदा जाने/ खिड़कियां नहीं खुलतीं आईने अकेले हैं।
खिड़कियां कई बार अपनी बेरहमी से आईनों को अकेला कर देती हैं और आईने हैं कि तड़पते रह जाते हैं। वे नहीं जानतीं कि उनके खुलने से आईने मुसकरा उठते हैं और बंद होते ही उदास हो जाते हैं। पर खिड़कियां भी कई बार किसी के इंतजार में बेचैन और अकेली होती हैं। वे सुबह से शाम तक अपने पट खोले उन आईनों में सूरत देखने के लिए बदहवास रहती हैं, जिनमें एक बार अपना अक्स देख चुकी होती हैं। मुनव्वर राना ने कहा भी है, हमारा रास्ता तकते हुए पथरा गई होंगी, वे आंखें जिनको हम खिड़की पर रख छोड़ आए हैं। पर कुछ खिड़कियां बहुत समझदार किस्म की होती हैं। वे सांकेतिक भाषा का अनुवाद भी कर लेती हैं और तभी खुलती हैं, जब उन्हें इसकी जरूरत महसूस होती है। अगर आप अच्छे पारखी हैं, तो खिड़कियों के खुलने व बंद होने से भी समय का अंदाजा लगा सकते हैं। खिड़कियां जब हमारी इच्छानुसार खुलती हैं, तो दिन ज्यादा छोटे, पुरसुकून और खिले-खिले हो जाते हैं।
हममें से बहुतों की उम्र जब पचास पार कर जाती है, तब खिड़कियों का अर्थ हमारे लिए वही नहीं रहता, जो बीस की उम्र में रहा होता था। जिन लोगों के सपनों में कोई खिड़की नहीं आती, वे भाग्यशाली नहीं होते। खिड़की हर बार अपने साथ एक अदद चेहरा लेकर आती है और उसे अपने फ्रेम में जड़ देती है।

जब हम पचास के हो जाते हैं, तब खिड़कियों का अर्थ हमारे लिए वही नहीं रहता, जो बीस की उम्र में रहता है